बैक्टीरिया से लड़ता है नीम

दुनिया बैक्टीरिया से भरी पड़ी है। हमारा शरीर बैक्टीरिया से भरा हुआ है। एक सामान्य आकार के शरीर में लगभग दस खरब कोशिकाएँ होती हैं और सौ खरब से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। आप एक हैं, तो वे दस हैं। आपके भीतर इतने सारे जीव हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। अगर आप नीम का सेवन करते हैं, तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है।

चुकंदर खाने के फायदे

चुकंदर खाने के फायदे

सब्जी के रुप में भी चुकंदर सेहत के लिए काफी लाभदायक है. इसमें कार्बोहाइड्रेट और कम मात्रा में प्रोटीन और वसा पाया जाता है. इसका जूस सब्जियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.

- सलाद के रुप में भी इसका उपयोग सेहतमंद है.

- चुकंदर का जूस पीने से खून बढ़ता है.

- चुकंदर का जूस पीलिया, हेपेटाइटिस, मतली और उल्टी के उपचार में लाभप्रद है.

- चुकंदर के नियमित सेवन से कब्ज से बचा जा सकता है.

- ये बवासीर के रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. चुकंदर का जूस अकार्बनिक कैल्शियम को संग्रहित करने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है.

ऐसे व्‍यायाम जो चेहरा बनाए टाइट और चमकदार

 ऐसे व्‍यायाम जो चेहरा बनाए टाइट और चमकदार

यह एक सिंपल सा वर्कआउट है जो दिखने में थोड़ा कठिन लगता है मगर एक-दो बार के अभ्‍यास से इसे आसानी से किया जा सकता है। आप एक दीवार का सहारा ले कर इसे कर सकते हैं। इसे कभी भी अकेले ना करें, कोशिश करें कि आपके साथ एक दोस्‍त या घर का कोई सदस्‍य हो। यह वर्कआउट शरीर में खून के बहाव को तेज करेगा जिससे चेहरा निखरेगा। यह त्‍वचा से झुर्रियों को मिटाने में मददगार है।

1) पसीना बहाने वाला वर्कआउट :-
ऐसा कोई व्‍यायाम करें जिसमें शरीर से खूब पसीना निकले। आप के लिये एरोबिक्‍स या फिर स्‍विमिंग अच्‍छी रहेगी क्‍योंकि इससे पसीना निकलता है। इन व्‍यायामों से शरीर लचीला और त्‍वचा चमकदार बनती है।

शंखपुष्पी की सेवन विधि।

शंखपुष्पी का समग्र क्षुप अर्थात पंचांग ही एक साथ औषधीय उपयोग के काम आता है। इस पंचांग को सुखाकर चूर्ण या क्वाथ के रूप में अथवा ताजा अवस्था में स्वरस या कल्क के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इनकी सेवन की मात्रा इस प्रकार है।
शंखपुष्पी पंचांग चूर्ण – ३ से ६ ग्राम की मात्रा में दिन में दो या तीन बार।
शंखपुष्पी स्वरस – २० से 45 मि ली दिन में दो या तीन बार।
शंखपुष्पी कल्क – १० से 20 ग्राम दिन में दो या तीन बार।

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