शंखपुष्पी की सेवन विधि।

शंखपुष्पी का समग्र क्षुप अर्थात पंचांग ही एक साथ औषधीय उपयोग के काम आता है। इस पंचांग को सुखाकर चूर्ण या क्वाथ के रूप में अथवा ताजा अवस्था में स्वरस या कल्क के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इनकी सेवन की मात्रा इस प्रकार है।
शंखपुष्पी पंचांग चूर्ण – ३ से ६ ग्राम की मात्रा में दिन में दो या तीन बार।
शंखपुष्पी स्वरस – २० से 45 मि ली दिन में दो या तीन बार।
शंखपुष्पी कल्क – १० से 20 ग्राम दिन में दो या तीन बार।

फल खाने का सही तरीका :

फल खाने का सही तरीका :

1. हमेशा ताजे फल खाएं और इसे दूध, दही या किसी चीज के साथ बिल्कुल भी ना खाएं। इसे खाने के कम से कम आधे घंटे तक कुछ भी ना खाएं।

2. कुछ फल ऐसे होते हैं जिन्हें आप दिन भर में कभी भी खा सकते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें शाम को नहीं खाना चाहिये।

3. फलों को खाने का सबसे सही वक़्त सुबह का होता है। आप सुबह खाली पेट फल खाएं तो वो बहुत फायदेमंद है। सिर्फ सिट्रस या खट्टे फलों को सुबह खाली पेट नहीं खाना चाहिये क्योंकि इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है।केला, सेब और आम जैसे फलों को आप सुबह खा सकते हैं।

4. अगर आप तरबूज खा रहे हैं तो उसके साथ कोई भी दूसरी चीज ना खाएं।

खाने के पहले या बाद में फल खाना

खाने के पहले या बाद में फल खाना

आयुर्वेद में बताया गया है कि जब आप खाने के ठीक पहले या बाद में फल खाते हैं तो उस समय सारा शरीर खाना को पचाने में व्यस्त रहता है। ऐसे में वो फल पेट में उसी तरह पड़ा रह जाता है।

आयुर्वेद में जो टॉक्सिन ठीक से पच नहीं पाते हैं उन्हें अमा का नाम दिया गया है। ऐसे में फल का वेस्टेज जो ठीक से पच नहीं पाता हैं वे आहार नली में जाकर इकठ्ठा होती रहती हैं। जिस वजह से पेट के एसिड का स्त्राव प्रभावित होता है साथ ही अपच और जलन जैसी समस्याएं होती हैं।

शोरगुल से बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा

शोरगुल से बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा

हाल ही में किए गए एक अध्‍ययन के अनुसार, ट्रैफिक शोर के कारण हार्टअटैक पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। सड़क पर होने वाला शोर, रेल ट्रैफिक शोर, हवाईयात्रा के दौरान होने वाले शोर से व्‍यक्ति के दिल पर गहरा असर पड़ता है। हाईवे के नजदीक रहना, आपके दिल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

अध्‍ययन के लिए, जर्मनी के प्रौद्योगिकी के ड्रेसडेन विश्‍वविद्यालय से एंड्रियास सीडलर और उनके मित्रों ने पूरे जर्मनी में कई वर्षों तक मूल्यांकन सांविधिक स्वास्थ्य बीमा कंपनियों से जानकारी को प्राप्‍त किया और अध्‍ययन किया। 

करेला के औषधीय गुण

एक असाध्य बीमारी है मधुमेह ‘डायबिटीज’ । करेला मधुमेह के रोगियों के लिए ‘अमृत’ तुल्य है। 100 मिली. के रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है और प्रात: चार किलोमीटर टहलना चाहिए तथा मिठाई खाने से परहेज रखना चाहिए। करेला मधुमेह के अलावा अन्य शारीरिक तकलीफों में भी लाभदायक है। जैसे-
कब्ज : नित्य करेला सेवन करने से कब्ज दूर होता है। यह एक अनुपम सब्जी है और इसमें ज्यादा तेल-मसाले नहीं डालने चाहिए।

पीलिया : ताजा करेले का रस सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।
दमा : दमा के मरीज भी करेले का रस सुबह खाली पेट लेकर राहत पा सकते हैं। सब्जी भी ज्यादा खानी चाहिए।

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