स्वच्छता पर ध्यान दें

डॉक्टर भी कहते हैं कि बच्चों को बेहद ठंडी हवा और बहुत कम तापमान की स्थिति से बचाना जरूरी है, लेकिन इतना ही जरूरी वे एक और सावधानी को बताते हैं। उनके मुताबिक इस मौसम में बच्चों को साफ-सफाई उपलब्ध करवाने और संक्रमण से दूर रखने का खयाल रखना और भी जरूरी है। यानी सिर्फ तेज हवा से बचा लेना या खूब सारे गर्म कपड़े पहना देना पर्याप्त नहीं। भोजन से लेकर साफ-सफाई तक में इस दौरान अलग से सावधानी बरतनी होती है।

हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी का प्रयोग।

हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी

ऐसी स्थिति में शंखपुष्पी थाइरोइड ग्रंथि के स्त्राव को संतुलित मात्रा में बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शंखपुष्पी का सेवन थायरो टोक्सिकोसिस के नए रोगियों में एलोपैथिक की औषधियों से भी अधिक प्रभावशाली कार्य करती है। यदि किसी रोगी ने आधुनिक पैथी की एंटी थाइरोइड औषधियों का पहले सेवन किया हो और उनके कारण रोगी में दुष्प्रभाव उत्पन्न हो गए हों, तो शंखपुष्पी उनसे रोगी को मुक्ति दिला सकने में समर्थ है।

सर्दियों में सांस के रोगी रहें सचेत

सर्दियों में सांस के रोगी रहें

सर्दियों में तापमान में कमी और वातावरण में प्रदूषित तत्वों की बढ़ी हुई मात्रा सेहत के लिए मुसीबत का कारण बन सकती है। सर्दियों का मौसम खासतौर पर सांस के मरीजों के स्वास्थ्य के लिए चुनौती बन जाता है। इस मौसम में सांस संबंधी दिक्कतें जैसे दमा, फ्लू और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
प्रदूषित कोहरे का दुष्प्रभाव

तेजपत्ते में होते हैं ये औषधीय गुण

मसाले के तौर पर इस्तेमाल होने वाली इन पत्तियों में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में ऐंटी-ऑक्सिडेंट पाया जाता है। इसके अलावा इन पत्तियों में कई तरह के प्रमुख तत्व जैसे कॉपर, पोटैशियम, कैल्शियम, सेलेनियम और आयरन पाया जाता है। किडनी स्टोन और किडनी से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं के लिए तेजपत्ते का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है। तेजपत्ते को उबालकर उस पानी को ठंडा करके पीने से किडनी स्टोन और किडनी से जुड़ी दूसरी समस्याओं में फायदा मिलता है। सोने से पहले तेजपत्ते का इस्तेमाल करना अच्छी नींद के लिए बहुत फायदेमंद है। तेजपत्ते के तेल की कुछ बूंदों को पानी में मिलाकर पीने से अच्छी नींद आ

एप्पल और हरे टमाटर से रहेंगी मांसपेशियां मजबूत

एप्पल और हरे टमाटर से रहेंगी मांसपेशियां मजबूत

बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों में कमजोरी और क्षरण के कारक प्रोटीन का पता लगाने के दौरान यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के वैज्ञानिकों ने दो ऐसे प्राकृतिक यौगिकों का भी पता लगाया है जो बूढ़ी होती मांसपेशियों में इस प्रोटीन की सक्रियता को कम कर देते हैं, जिसके कारण मांसपेशियों के क्षरण और कमजोरी को कम किया जा सकता है। एटीएफ4 नामक यह प्रोटीन मांसपेशियों के जीन की अभिव्यक्ति में बदलाव लाता है, जिसके कारण मांसपेशियों के प्रोटीन संश्लेषण, ताकत और घनत्व में कमी आ जाती है।

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