बड़े काम का है शहद

बड़े काम का है शहद

एंटीएजिंग गुण
शहद में एन्टीबैक्टीरियल और एन्टीमाइक्रोबियल तत्व पाये जाते हैं। ये स्किन से डेड सेल्स निकाल कर झुर्रियों को आने से रोकता है। शहद ह्युमेंक्टेंट यौगिक से भरपूर होता है जो त्वचा में नमी बरकरार रखते हैं ताकि त्वचा की कोमलता बनी रहे। अगर इसे रोज त्वचा पर लगाया जाए तो आपकी त्वचा चमकदार और कोमल हो जाती है।

हैल्दी ब्रेकफास्ट जरूर लें

हैल्दी ब्रेकफास्ट जरूर लें

जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते उन्हें तरह-तरह की शारीरिक समस्याएं तो होती ही हैं, इसके अलावा वो पूरे दिन थके-थके से रहते हैं। इसलिए हर दिन हैवी हैल्दी नाश्ता लें। ध्यान रहे नाश्ते में प्रोटीन, फाइबर के साथ-साथ सारे पोषक तत्व शामिल हों, जैसे ओट्स, दलिया, दूध, पनीर, फल वगैरह। अच्छे ब्रेकफास्ट से दिन की शुरुआत करने से आप खुद में एक खास बदलाव देख पाएंगी।

रीठा के बालों के...ही नहीं त्वचा व सेहत के लिए भी लाभ

रीठा एक प्राकृतिक क्लींजर है यह बाल व त्वचा की गंदगी और तेल को निकालने में मदद करता है। रीठा का वृक्ष बडा तथा पत्ते लंबे होते हैं। इसके हल्के गुलाबी रंग के फूल ही फूलों का रूप धारण कर लेते हैं। इसका फल पानी में डाले पानी में डालने पर झाग उत्पन्न करता है। हिस्टीरिया के दौरे पडने वाले रोगी के छिलकों को जलाकर उसका धुआं देना चाहिए एक महा तक उसकी धूनी के प्रयोग से हिस्टीरिया के दौरे पडने बंद हो जाते हैं। 

बेसन त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करता है

बेसन त्वचा

बेसन तो हर घर में आसानी से मिल जाता है। इससे पकौड़े, सब्जी और मीठा बनाने में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन सिर्फ खाने में ही नहीं बल्कि बेसन से की ब्यूटी ट्रीटमैंट भी किए जा सकते हैं। बेसन का लेप बनाकर चेहरे पर लगाने से त्वाच में निखार आता है और इससे स्किन से जुड़ी कई समस्याओं से भी छुटकारा पाया जा सकता है। आइए जानिए बेसन से और क्या-क्या फायदे होते हैं। 
1. ऑयली स्किन : कुछ महिलाओं की त्वचा बहुत तैलीय होती है। इसके लिए बेसन में कच्चा दूध मिलाकर चेहरे पर लगाएं और कुछ देर बाद पानी से साफ करें। हफ्ते में 2 बार इसका इस्तेमाल करने से त्वचा का एक्सट्रा तेल निकल जाएगा।

स्तनपान करने वाले बच्चे युवाकाल में अधिक आईक्यू वाले होते हैं

स्तनपान करने वाले बच्चे युवाकाल में अधिक आईक्यू वाले होते हैं

स्तनपान को हमेशा से ही बच्चे की सेहत के लिए लाभदायक माना जाता रहा है। एक ताजा शोध में कहा गया है कि जन्म के बाद ज्यादा दिनों तक स्तनपान करने वाले बच्चे युवाकाल में अधिक आईक्यू वाले होते हैं और यह उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति के लिए भी फायदेमंद है।

जरूरी है व्यायाम

जरूरी है व्यायाम

अक्सर लोग जाड़े के दिनों में व्यायाम बंद कर देते हैं। इसका बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। हमारे देश में जाड़े के मौसम में लोग भोजन की खुराक बढ़ा देते हैं। बड़ों के दबाव में बच्चों को भी ज्यादा खाना पड़ता है। इस दौरान लोग अक्सर खाने में तेल और घी का उपयोग काफी बढ़ा देते हैं। जाड़े का मौसम लोगों को आलसी भी बनाता है। इस तरह शरीर पर दोहरा बोझ पड़ जाता है। इसमें संतुलन कायम रखना बहुत जरूरी है। नियमित व्यायाम कर के आप अपने शरीर का रक्त संचार और ऑक्सीजन का स्तर दोनों ठीक रख सकते हैं। यह आपको ठंड से लड़ने में मदद करेगा। आयुर्वेद में कई ऐसे तरीके भी बताए गए हैं, जिनके जरिए बच्चों को अंदर से मजबूत बनाया

फलों और सब्जियों पर दें ध्यान

फलों और सब्जियों

पूरे जाड़े के मौसम में बच्चों को फल और सब्जियां पर्याप्त मात्रा में खिलाएं। जाड़े में उपलब्ध होने वाले कुछ फलों को लेकर लोगों में अनेक भ्रांतियां व्याप्त हैं, मगर यह सोचकर कि ये ठंडी तासीर के होते हैं, बच्चों को इनके फायदे से दूर नहीं करें।

अधिकांश जगहों पर इन दिनों अमरूद पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। इसी तरह आंवला तो खास तौर पर इसी मौसम में होता है और इसे शरीर के लिए अमृत की तरह माना गया है। नियमित रूप से बच्चा अगर एक आंवला खा ले, तो उसकी रोग प्रतिरोधी क्षमता काफी बढ़ सकती है। सर्दियों में बच्चों को विटामिन और मिनरल से भरपूर आहार देना चाहिए।

सुबह की धूप फायदेमंद

सुबह की धूप

कुछ जगहों पर तेज शीतलहर चलने लगी है, जबकि दूसरी जगहों पर भी ऐसी बयार आने की तैयारी में है। ऐसे में जरूरी है कि तेज हवा के झोंकों से बच्चों को बचाया जाए, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि तापमान थोड़ा कम होते ही आप उन्हें ताजा हवा और आउटडोर गेम्स से पूरी तरह दूर कर दें। जाड़े में दिन छोटे होते हैं। कुछ दिनों बाद तो अक्सर धूप भी मुश्किल से दिखेगी। इसलिए जरूरी है कि बच्चों के शरीर को धूप लगे। इस मौसम में भी बच्चों को कुछ समय के लिए बाहर खेलने की छूट देनी चाहिए। यह भी ध्यान रहे कि खासकर सुबह की धूप शरीर में विटामिन डी की कमी को दूर करती है।

स्वच्छता पर ध्यान दें

डॉक्टर भी कहते हैं कि बच्चों को बेहद ठंडी हवा और बहुत कम तापमान की स्थिति से बचाना जरूरी है, लेकिन इतना ही जरूरी वे एक और सावधानी को बताते हैं। उनके मुताबिक इस मौसम में बच्चों को साफ-सफाई उपलब्ध करवाने और संक्रमण से दूर रखने का खयाल रखना और भी जरूरी है। यानी सिर्फ तेज हवा से बचा लेना या खूब सारे गर्म कपड़े पहना देना पर्याप्त नहीं। भोजन से लेकर साफ-सफाई तक में इस दौरान अलग से सावधानी बरतनी होती है।

हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी का प्रयोग।

हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी

ऐसी स्थिति में शंखपुष्पी थाइरोइड ग्रंथि के स्त्राव को संतुलित मात्रा में बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शंखपुष्पी का सेवन थायरो टोक्सिकोसिस के नए रोगियों में एलोपैथिक की औषधियों से भी अधिक प्रभावशाली कार्य करती है। यदि किसी रोगी ने आधुनिक पैथी की एंटी थाइरोइड औषधियों का पहले सेवन किया हो और उनके कारण रोगी में दुष्प्रभाव उत्पन्न हो गए हों, तो शंखपुष्पी उनसे रोगी को मुक्ति दिला सकने में समर्थ है।

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