हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी का प्रयोग।

हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी

ऐसी स्थिति में शंखपुष्पी थाइरोइड ग्रंथि के स्त्राव को संतुलित मात्रा में बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शंखपुष्पी का सेवन थायरो टोक्सिकोसिस के नए रोगियों में एलोपैथिक की औषधियों से भी अधिक प्रभावशाली कार्य करती है। यदि किसी रोगी ने आधुनिक पैथी की एंटी थाइरोइड औषधियों का पहले सेवन किया हो और उनके कारण रोगी में दुष्प्रभाव उत्पन्न हो गए हों, तो शंखपुष्पी उनसे रोगी को मुक्ति दिला सकने में समर्थ है।

अनेक वैज्ञानिकों ने अपने प्रारंभिक अध्ययनों में पाया है के शंखपुष्पी के सक्रिय रसायन सीधे ही थाइरोइड ग्रंथि की कोशिकाओं पर प्रभाव डालकर उसके स्त्राव का पुनः नियमन करते है। इसके रसायनों की कारण मस्तिष्क में एसिटाइल कोलीन नामक अति महत्वपूर्ण तंत्रिका संप्रेरक हॉर्मोन का स्त्राव बढ़ जाता है। यह हॉर्मोन मस्तिष्क स्थिति, उत्तेज़ना के लिए उत्तरदायी केन्द्रों को शांत करता है। इसके साथ ही शंखपुष्पी एसिटाइल कोलीन के मस्तिष्क की रक्त अवरोधी झिल्ली (ब्लड ब्रेन वैरियर) से छनकर रक्त में मिलने को रोकती है, जिससे यह तंत्रिका संप्रेरक हॉर्मोन अधिक समय तक मस्तिष्क में सक्रिय बना रहता है।