शंखपुष्पी की सेवन विधि।

शंखपुष्पी का समग्र क्षुप अर्थात पंचांग ही एक साथ औषधीय उपयोग के काम आता है। इस पंचांग को सुखाकर चूर्ण या क्वाथ के रूप में अथवा ताजा अवस्था में स्वरस या कल्क के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इनकी सेवन की मात्रा इस प्रकार है।
शंखपुष्पी पंचांग चूर्ण – ३ से ६ ग्राम की मात्रा में दिन में दो या तीन बार।
शंखपुष्पी स्वरस – २० से 45 मि ली दिन में दो या तीन बार।
शंखपुष्पी कल्क – १० से 20 ग्राम दिन में दो या तीन बार।

इनके अतिरिक्त शंखपुष्पी से निर्मित ऐसे कई शास्त्रोक्त योग है, जिन्हें विभिन्न रोगों में उपयोग कराया जाता है। जैसे के शंखपुष्पी रसायन, सोमघृत, ब्रह्मा रसायन, अगस्त्य रसायन, वचाघृत, जीवनीय घृत, ब्रह्मघृत इत्यादि।