जडीबुटी

हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी का प्रयोग।

हाइपर थाइरोइड में शंखपुष्पी

ऐसी स्थिति में शंखपुष्पी थाइरोइड ग्रंथि के स्त्राव को संतुलित मात्रा में बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शंखपुष्पी का सेवन थायरो टोक्सिकोसिस के नए रोगियों में एलोपैथिक की औषधियों से भी अधिक प्रभावशाली कार्य करती है। यदि किसी रोगी ने आधुनिक पैथी की एंटी थाइरोइड औषधियों का पहले सेवन किया हो और उनके कारण रोगी में दुष्प्रभाव उत्पन्न हो गए हों, तो शंखपुष्पी उनसे रोगी को मुक्ति दिला सकने में समर्थ है।

एप्पल और हरे टमाटर से रहेंगी मांसपेशियां मजबूत

एप्पल और हरे टमाटर से रहेंगी मांसपेशियां मजबूत

बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों में कमजोरी और क्षरण के कारक प्रोटीन का पता लगाने के दौरान यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के वैज्ञानिकों ने दो ऐसे प्राकृतिक यौगिकों का भी पता लगाया है जो बूढ़ी होती मांसपेशियों में इस प्रोटीन की सक्रियता को कम कर देते हैं, जिसके कारण मांसपेशियों के क्षरण और कमजोरी को कम किया जा सकता है। एटीएफ4 नामक यह प्रोटीन मांसपेशियों के जीन की अभिव्यक्ति में बदलाव लाता है, जिसके कारण मांसपेशियों के प्रोटीन संश्लेषण, ताकत और घनत्व में कमी आ जाती है।

बीमारियों के लिए नीम

बीमारियों के लिए नीम

नीम के बहुत-से अविश्वसनीय लाभ हैं, उनमें से सबसे खास है – यह कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। हर किसी के शरीर में कैंसर वाली कोशिकाएं होती हैं, लेकिन वे एक जगह नहीं होतीं, हर जगह बिखरी होती हैं। किसी वजह से अगर आपके शरीर में कुछ खास हालात बन जाते हैं, तो ये कोशिकाएं एकजुट हो जाती हैं। छोटे-मोटे जुर्म की तुलना में संगठित अपराध गंभीर समस्या है, है कि नहीं?

चुकंदर खाने के फायदे

चुकंदर खाने के फायदे

सब्जी के रुप में भी चुकंदर सेहत के लिए काफी लाभदायक है. इसमें कार्बोहाइड्रेट और कम मात्रा में प्रोटीन और वसा पाया जाता है. इसका जूस सब्जियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.

- सलाद के रुप में भी इसका उपयोग सेहतमंद है.

- चुकंदर का जूस पीने से खून बढ़ता है.

- चुकंदर का जूस पीलिया, हेपेटाइटिस, मतली और उल्टी के उपचार में लाभप्रद है.

- चुकंदर के नियमित सेवन से कब्ज से बचा जा सकता है.

- ये बवासीर के रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. चुकंदर का जूस अकार्बनिक कैल्शियम को संग्रहित करने का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है.

शंखपुष्पी की सेवन विधि।

शंखपुष्पी का समग्र क्षुप अर्थात पंचांग ही एक साथ औषधीय उपयोग के काम आता है। इस पंचांग को सुखाकर चूर्ण या क्वाथ के रूप में अथवा ताजा अवस्था में स्वरस या कल्क के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इनकी सेवन की मात्रा इस प्रकार है।
शंखपुष्पी पंचांग चूर्ण – ३ से ६ ग्राम की मात्रा में दिन में दो या तीन बार।
शंखपुष्पी स्वरस – २० से 45 मि ली दिन में दो या तीन बार।
शंखपुष्पी कल्क – १० से 20 ग्राम दिन में दो या तीन बार।

फल खाने का सही तरीका :

फल खाने का सही तरीका :

1. हमेशा ताजे फल खाएं और इसे दूध, दही या किसी चीज के साथ बिल्कुल भी ना खाएं। इसे खाने के कम से कम आधे घंटे तक कुछ भी ना खाएं।

2. कुछ फल ऐसे होते हैं जिन्हें आप दिन भर में कभी भी खा सकते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें शाम को नहीं खाना चाहिये।

3. फलों को खाने का सबसे सही वक़्त सुबह का होता है। आप सुबह खाली पेट फल खाएं तो वो बहुत फायदेमंद है। सिर्फ सिट्रस या खट्टे फलों को सुबह खाली पेट नहीं खाना चाहिये क्योंकि इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है।केला, सेब और आम जैसे फलों को आप सुबह खा सकते हैं।

4. अगर आप तरबूज खा रहे हैं तो उसके साथ कोई भी दूसरी चीज ना खाएं।

चुकंदर खाओ, रोग भगाओ

अगर आप खुद को दुरुरत रखना चाहते हैं, तो चुकंदर को अपना दोस्त बना लें. चुकंदर को आप सब्जी के रूप में भी खा सकते हैं या फिर इसका जूस पी सकते हैं. इसमें सोडियम, पोटैशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, सल्फर, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन, विटामिन बी1, बी2, और विटामिन सी पाया जाता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद है.

चुकंदर खाने के फायदे

- ये Digestive System में पहुंचकर नाइट्रिक ऑक्साइड बन जाता है और Blood Circulation को बढ़ाता है और Blood pressure को कम रखता है.

गाजर है ब्रेस्ट कैंसर से बचाव का बेहतर उपाय

गाजर है ब्रेस्ट कैंसर से बचाव का बेहतर उपाय

बेस्ट कैंसर की अंतिम स्टेज में सर्जरी कराने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं रह जाता है. पर हाल ही में हुए एक शोध में कहा गया है कि गाजर खाने से ब्रैस्ट कैंसर  होने की आशंका  60 फीसदी तक कम हो जाती है. इसमें मौजूद बीटा कैरोटीन कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक होता है. इसके अलावा दूसरी कई ऐसी सब्जियां और फल हैं जिनमें बीटा-कैरोटीन पाया जाता है. पालक, लाल मिर्च और आम में भी इस तत्व की प्रचुर मात्रा होती है. 

शुक्र क्षय व नपुंसकता -कपिकच्छु

इसकी लता सेम के समान होती है हिन्दी में इसे केवाच या कौंच कहते है पत्र ३-६ इंच लम्बे होते है इस पर नीले या बैंगनी रंग के पुष्प आते है 

इसके बीजो में प्रोटीन ,खनिज पदार्थ ,कैल्शियम ,फस्फोरोस ,लोह ,गंधक ,मैगजीन होता है 

बीजो में डोपा ,ग्लुताबयन,लेसिथिन ,गेलिक एसिड ,ग्लूको - साइड क्षार ,निकोटीन आदि पाए जाते है 

बीज मज्जा से भूरे रंग का तेल निकलता है 

बीज व मूल चूर्ण नाडी की कमजोरी में प्रयोग होते है 

गंडूपद कीड़ो को मरने के  लिए १२५ मिली ग्राम फलो के रोम गुड या  मक्खन ,में मिला कर देते है 

मूत्र व गुर्दा रोगों में देते है 

बालो को प्राक्रतिक रूप से काला करे-गुड़हल

गुड़हल यानी hibiscus rosa sinensis शाखा युक्त ५-८ फुट ऊँचा पौधा होता है 

फूल प्रायः लाल रंग के होते है पुन्केशर बाहर निकले रहते है 

यह समस्त भारत में पाया जाता है 

फूलो में नाइट्रोजन ,बसा ,कैल्शियम ,फास्फोरस ,लोह ,विटामिन बी ,सी होता है 

पुष्पों को घिसने पर गहरा बैगनी रंग निकलता है जो केशो को कला करता है 

खालित्य -पालित्य में इसके पुष्पों को गोमूत्र में पीस कर लगाते है 

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