शुक्र क्षय व नपुंसकता -कपिकच्छु

इसकी लता सेम के समान होती है हिन्दी में इसे केवाच या कौंच कहते है पत्र ३-६ इंच लम्बे होते है इस पर नीले या बैंगनी रंग के पुष्प आते है 

इसके बीजो में प्रोटीन ,खनिज पदार्थ ,कैल्शियम ,फस्फोरोस ,लोह ,गंधक ,मैगजीन होता है 

बीजो में डोपा ,ग्लुताबयन,लेसिथिन ,गेलिक एसिड ,ग्लूको - साइड क्षार ,निकोटीन आदि पाए जाते है 

बीज मज्जा से भूरे रंग का तेल निकलता है 

बीज व मूल चूर्ण नाडी की कमजोरी में प्रयोग होते है 

गंडूपद कीड़ो को मरने के  लिए १२५ मिली ग्राम फलो के रोम गुड या  मक्खन ,में मिला कर देते है 

मूत्र व गुर्दा रोगों में देते है 

बालो को प्राक्रतिक रूप से काला करे-गुड़हल

गुड़हल यानी hibiscus rosa sinensis शाखा युक्त ५-८ फुट ऊँचा पौधा होता है 

फूल प्रायः लाल रंग के होते है पुन्केशर बाहर निकले रहते है 

यह समस्त भारत में पाया जाता है 

फूलो में नाइट्रोजन ,बसा ,कैल्शियम ,फास्फोरस ,लोह ,विटामिन बी ,सी होता है 

पुष्पों को घिसने पर गहरा बैगनी रंग निकलता है जो केशो को कला करता है 

खालित्य -पालित्य में इसके पुष्पों को गोमूत्र में पीस कर लगाते है 

नपुंसकता -अकरकरा

यह झाड़ीदार रोम युक्त क्षुप होता है इसके पर ग्रंथिया होती है जड़ ३-४ इंच लम्बी होती है पुष्प श्वेत ,बैंगनी ,पीले रंग के होते है 

यह पक्षाघात ,नसों की कमजोरी ,में तेल का प्रयोग करते है 

इसका प्रयोग दांत शूल ,विद्रधि ,वेदना में भी होता है 

पीनस,प्रतिश्याय में नस्य देते है 

ध्वंज भंग ,शीघ्र पतन में एक मूल प्रयोग करते है 

हड्डी जोड़ने की बेजोड़ दवा -अस्थि श्रंखला

यह पर्व युक्त लम्बी, मांसल लता होती है इसका तना हरा ,चतुष्कोण होता है 

पत्र कम ,ह्रदय की आकृति के ३-५ भागों में बटे रहते है 

पुष्प छोटे हरे श्वेत वर्ण के गुच्छों में होते है 

फल गोल, लाल ,रसदार ,मटर के बराबर एकबीजी होते है 

फूल बर्षा में तथा फल शीत काल में आते है 

श्री लंका व दक्षिण भारत में इसका शाक खाया जाता है 

यह भारत के उष्ण भागों में पाया जाता है 

इसमे प्रोटीन ,बसा ,कार्बोहायड्रेट ,राख,मुसिलेज ,पेक्टिन ,विटामिन्स पाए जाते है 

इसकी भस्म में सोडियम ,पोटासियम ,मग्निसियम ,कैल्शियम के कार्बोनेट व फॉस्फेट पाए जाते है 

मूत्र रोगों की अचूक दवा -खस /उशीर

खस गाडर नाम के त्रण की जड होती है इसका पौधा २-५ फुट उचा होता है पत्र १-२ फुट लम्बे होते है पुष्प दण्ड४-१२ इंच लम्बा होता है बर्षा में  पुष्प व फल लगते है इसकी जड़ो में सुंगध होती है जो सुखाने के साथ बड़ती है सुखी जड़ो को जल में भिगोने पर सुगन्ध निकलती है 

खस विशेष रूप से दक्षिण भारत ,बंगाल ,राजस्थान ,नागपुर व जल स्रोतों के पास पाया जाता है 

इसमे उड़नशील तेल ,राल,रंग द्रव्य ,अम्ल ,चुना ,लोहा होता है 

शीत गुण के कारण मुत्रजनन करता है 

यह कफ पित्तजन्य विकारो में लाभ देता है 

दाह ,चर्म रोग ,और अति स्वेद में लेप लाभ देता है 

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